दादा ने पोती को जबर्दस्ती चोदकर शादी की

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Dada poti sex kahani:- हैलो दोस्तों मेरा नाम हरलीन है, इस कहानी मे, मै आपको अपनी रियल स्टोरी बताने जा रहै हूँ कि कैसे मेरे दादाजी ने मुझे पटाकर मेरे से शादी करके मुझे अपनी बीवी बना लिया। ये कहानी आपको मस्त कर देगी और आपके लोड़े को खड़ा कर देगी। तो हो जाइए तैयार अपना लोड़ा हिलाने के लिए। तो आपका ज्यादा समय नहीं लूँगी सीधे स्टोरी पर चलती हूँ। इस कहानी के हीरो मेरे दादा जी है। मै अपने दादा जी के बारे मे बता दू, मेरे दादा जी रिटायर्ड मेजर जनरल बलबीर सिंह है। उनकी उम्र इस समय 60 के करीब है। 60 साल की उम्र के बावजूद भी दादा जी इतने फिट है कि किसी भी जवान लड़के को पछाड़ दे। बुढ़ापा तो उन से मानो कोसो दूर था, चेहरे पर एक अलग है तरह की चमक और लाली थी। उनकी हाइट 6.4 और शरीर एक दम गठीला था, जैसा कि आमतौर पर एक फ़ौजी का होता है। उन्होंने अपने बदन को इतना फिट रखा था। उनकी बड़ी बड़ी आँखे हमेशा लाल है रहती थी, जैसे उन्होंने कोई नशा किया हो। उनका 52 इंच चौड़ा सीना, उसको देख कर ना जाने कितनी लड़किया उन जैसा पति पाने की खवाहिश रखती थी। बड़ी बड़ी मूँछें, कुल मिला कर एक सम्पूर्ण मर्द थे। एक अलग है पर्सनालिटी के मालिक थे।

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अब आते है अगले किरदार के बारे मे यानि मेरी दादी जी, वो भी खूबसूरत थी और दादा जी के बहुत करीब थी। उनका इस कहानी मे कोई रोल नहीं है सो उनके बारे मे यहाँ बात करना उचित नहीं। फिर मेरे पिता जी, माँ और मेरा बड़ा भाई, उनका भी इस कहानी मे कोई रोल नहीं और आखिर मे बची मै यानि हरलीन। इस कहानी की लीड किरदार यानि इस कहानी की मैं हैरोइन। अब मै अपने बारे मे कुछ बता दूँ, मेरी उम्र अभी अट्ठारह साल से पुरे एक साल कम है और आप सब ये बात अच्छे से जानते है कि लड़कियों की ये उम्र कितनी खतरनाक और जान लेवा होती है, खास कर मेरे जैसी सुन्दर गोरी कली के लिए। इस कच्ची कली को मसलने के लिए हमारी कॉलोनी , स्कूल और यहाँ तक की स्कूल के टीचर भी बेताब रहते है। पर घर के अच्छे संस्कारो की वजह से मै इन चक्करों मे नहीं पड़ी थी। मुझ पर अभी जवानी आने लगी है थी। वैसे तो मेरी हाइट घर के बाकी लोगो की तरह ज्यादा नहीं है, मेरी हाइट 5 फुट 4 इंच है, रंग एक दम दूध की तरह गोरा, जब मै किसी के आगे शर्माती, तो मेरा दूध जैसा रंग ऐसे लाल हो जाता, जिसको देख कर तो मानो सामने वाले के दिल पर बिजलिया है गिरी हो. Dada poti sex kahani

वैसे तो लड़कियों पर सोलवां साल लगते है जवानी चढ़ने लगती है। मर्दो की नज़रे लड़की के यौन अंगों पर गड़ने लगती है। उसकी चूत मे खुजली होनी शुरू हो जाती है, उसमे से पानी बहने लगता है. उसके अंदर किसी मर्द की बाहों मे समा जाने की इच्छा जागने लगती है, उसके साथ प्यार और चुदाई का खेल खेलना की इच्छा होने लगती है. उसकी चूत का दाना फड़फड़ाता हुआ करंट मारता है। ये तो प्रकृति का नियम है, जो सब पर एक समान लागू होता है. सोल्वा साल लगते है लड़की के नींबू मे रस भरना शुरू हो जाता है. मेरी चूचिया भी नींबू के आकार का रूप ले चुके थे और मेरे 30 साइज के नींबू मे कितना रस भरा हुआ था, जो कोई भी मर्द देख कर आसानी से बता सकता था. सोलहवां साल लगते ही जहां लड़की की चूत पर हलके रोये आने शुरू हो जाते है, मेरी तो चूत पर रेशमी बालो का गुच्छा बन चुका था और सब से जान लेवा, मेरे बदन मे मेरी मस्त टाइट गद्देदार 30 साइज की गांड, जो अभी से थोड़ी बाहर को निकली हुयी थी। इस को आप इमेजिन करके सोच सकते है ऐसे लचकीली मस्त गांड के साथ जब मै चलती थी, तो मेरे दोनों चूतड़ आपस मे रगड़ कर कैसे ऊपर नीचे होते, उस नज़ारे को देखकर न जाने कितने मर्दो का पानी पैंट मे ही निकल जाता होगा. पर मैंने अपनी इस मस्त जवानी को अभी तक संभाल कर रखा था। किसी भी मर्द का हाथ अपनी इस कोरी जवानी पर पड़ने नहीं दिया था.

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खैर मै कहानी पर आती हूँ। हम सब एक ही घर मे रहते थे और सब एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे। हमारा जीवन बड़ी हंसी ख़ुशी से आगे बढ़ रहा था कि पता नहीं हमारी खुशियों को किसकी नज़र लग गयी। एक कार एक्सीडेंट मे मम्मी, पापा, भाई और दादी चारों की डेथ हो गयी .हम पर दुखो का पहाड़ टूट पड़ा. एक ऐसा गम जिसको हम जितना भुलाने की कोशिश करते उतना ही बढ़ता जाता। घर की हर चीज़ मुझे और दादा जी को उनकी याद दिलाती। तो दादा जी ने ये घर और शहर छोड़ने का फैसला कर लिया और मैं भी दादा जी की इस बात से सहमत थी। सो मैंने और दादी जी ने वो शहर छोड़ दिया और उस शहर से बहुत दूर एक अनजान शहर मे आ गए जहां हमे कोई नहीं जानता था। हम ने घर भी शहर से बाहर लिया, जहा आस पास कोई ज्यादा घर नहीं थे। हमे तो बस सुकून की तलाश थी, हम मम्मी पापा भैया की यादो को भुला कर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे। इन सब के बीच एक बात थी, दादा जी ने अब शराब काफी पीनी शुरू कर दी थी, मैंने कई बार उन्हें रोकने की कोशिश की, पर वो हमेशा मुझे चुप करा देते थे। Dada poti sex kahani

बोलते – तुम्हारी दादी और तुम्हारे मम्मी पापा को भुलाने का यही एक मात्र सहारा है।

अक्सर दादा जी को पीने के बाद होश नहीं रहता और वो नशे मे दादी का नाम लेकर बड़बड़ाते रहते थे। एक रात दादा जी ने बहुत शराब पी रखी थी और उनसे चलना तो दूर ठीक से खड़ा भी नहीं हुवा जा रहा था. हम दोनों ही एक दूसरे का सहारा थे, तो मै दादा जी को सहारा देकर उनको उनके बैडरूम की और ले जाने लगी. दादा जी लड़खड़ाते हुए चल रहे थे। उनके शरीर का भर मेरे ऊपर था, हम एक दूसरे को थामे चल रहे थे, मेरे साथ चलते हुए दादा जी मेरे बदन को अपने से चिपकाते हुए बोल रहे थे…

रेखा आई लव यू आई लव यू रेखा!

रेखा मेरी दादी का नाम था, जिसे दादा जी बहुत प्यार करते थे और यही कारण था कि दादा जी अभी तक दादी को भुला नहीं पा रहे थे। बेड़रूम तक आते आते दादा जी के हाथो ने मेरे बदन के लगभग हर अंग को छुआ था, मेरे गालो को, कमीज के ऊपर से मेरे नींबूओं को और मेरी गांड को। भले ही दादा जी ये सब नशे मे कर रहे थे और नशे मे वो मुझे दादी समझ कर ये सब कर रहे थे, ये मै जानती थी, पर हक़ीक़त तो यह थी ना की वो एक मर्द थे और मै एक औरत। मेरे अंगो को उनका इस तरह से छूना मसलना शायद मेरे अंदर की औरत को जगा रहा था। खैर मै किसी तरह उन्हें लेकर बैडरूम मे आयी और उनको बेड पर बिठा दिया। दादा जी को बेड पर बिठा कर जैसे ही जाने के लिए मुड़ी, दादा जी ने मुझे खींच कर अपने पास बिठा लिया और मुझे अपनी बाहों मे कस लिया और मेरे गालो को चूमने लगे। मेरे गालो को चूमते दादा जी नशे की हालत मे बड़बड़ा रहे थे।

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दादाजी – रेखा आई लव यू! कहाँ जा रही हो मुझे छोड़ कर! रुक जाओ ना मुझे तुम्हे प्यार करना है।

मै – दादा जी मै रेखा नहीं हूँ, मै हरलीन हूँ।

दादा जी मुझे चूमते हुए – नहीं तुम हरलीन नहीं तुम मेरी रेखा हो।

मै दादा जी की बाहों से निकलने की भरपूर कोशिश करने लगी पर वो किसी शेर की तरह और मै किसी चंचल हिरणी जैसे उनके होंठ लगातार मेरे गालो मेरे होंठो को चूम रहे थे, जबकि उनका एक हाथ मेरी चूचि के ऊपर, जिसे वो अपनी मुट्ठी मे भर कर दबा रहे थे। दादा जी मुझे लिए बिस्तर पर लेट गए और मेरे ऊपर चढ़ गए। मै उनके नीचे से निकलने की कोशिश मे छटपटाने लगी और अपने चेहरे को इधर उधर झटकने लगी. दादा जी मेरे ऊपर चढ़े मेरे गालो पर अपने होंठो को रगड़ रहे थे।

मै – प्लीज दादा जी ये गलत है मुझे छोड़ दीजिये।

पर उस समय तो दादा जी के ऊपर सेक्स का भूत सवार था, उन्होंने अपने होंठो को मेरे होंठो पर रख दिया जिससे मेरी आवाज़ मेरे होंठो मे ही दब गयी. दादा जी मेरे होंठो को चूस रहे थे, मेरी चूचि को दबा रहे थे, जबकि उनका लंड मेरी सलवार के ऊपर से मेरी चूत के ऊपर ठोकर मार रहा था। मेरा दिमाग दादा जी को मेरे साथ ऐसा करने से रोक रहा था, पर मेरा बदन मेरा साथ ना देते हुए दादा जी साथ दे रहा था। दादा जी जब मेरे ऊपर चढ़े, मेरे होंठ चूस रहे थे तो पता नहीं मै भी उनका साथ देते हुए उनके होंठो को चूसने लगी। तभी दादा जी मुझे थोड़ा ऊपर उठाया और मेरे बदन से मेरी कमीज को अलग करने लगे। मेरा दिमाग उन्हें ऐसा करने से रोकने को कहने लगा पर मेरा बदन मेरा साथ ना देते हुए मेरी बाजू खुद ही ऊपर उठ गयी। जिससे दादा जी ने मेरी बाजू से मेरी कमीज निकालकर वहीं ज़मीन पर फ़ेंक दी। मेरे गोर बदन पर ब्लैक कलर की ब्रा गजब ढा रही थी। मेरी ब्रा म क़ैद नींबू देखकर दादा जी तो और जोश मे भर उठे। Dada poti sex kahani

मै आज जीवन मे पहली बार किसी के सामने इस हालत मे थी, मुझे शर्म आ रही थी, पर मै कुछ कर भी नहीं पा रही थी। मैंने शर्म से अपनी आँखे बंद कर ली कि तभी मुझे अपनी चूचियों पर गरम साँसों का एहसास हुवा, तो मैंने थोड़ी सी आँखों को खोला और देखा दादा जी मेरी चूचियों पर झुके हुए है। मेरे देखते ही देखते दादा जी ने मेरी ब्रा के ऊपर अपने होंठ मेरे निप्पल पर रख दिया, ब्रा के साथ ही निप्पल को चूसने लगे।

ना चाहते हुए भी मेरे मुँह से आआआआआआआआआहहहहहहहहहहहहहह…. निकलने लगी।

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दादा जी ब्रा के साथ ही मेरे निप्पल चूसने लगे, कुछ देर ऐसे ही चूसने के बाद दादा जी ने मेरी ब्रा को मेरे नींबू से खींच कर निकाल लिया। मेरे नींबू के ऊपर गुलाबी रंग के निप्पल किसी चीज़ के दाने की तरह खड़े थे। उसको देख कर शायद ही कोई मर्द अपने आप को रोक पाता। दादा जी के सामने तो मेरे निप्पल उनके होंठो के बहुत करीब थे। तो दादा जी झुके और मेरी चूचि को अपने मुँह मे भर लिया। मेरे 30 साइज के नींबू दादा जी के मुंह मे पूरे आ चुके थे। जिसे दादा जी चूसने लगे, कोई भी लड़की हो, भले ही ये सब अपनी मर्ज़ी से ना कर रही हो और कोई भी मर्द, चाहे वो उसका बाप भी हो, अगर ऐसे उसकी चूचि को चूसता है तो वो लड़की ना चाहते हुए भी मस्ती मे उड़ने लगती है। कुछ रही हाल मेरा भी था, मुझे इस बात का एहसास नहीं रहा कि कब दादा जी ने मेरी सलवार का नाडा खोल कर सलवार मेरी टांगो से निकाल दी और अपने बदन से अपने कपड़ो को अलग कर दिया। मुझे इस बात का एहसास तब हुआ जब मुझे अपनी टांगो के बीच किसी सख्त चीज़ का एहसास हुआ।

मै कुछ समझ पाती इस से पहले ही दादा जी ने मेरी दोनों टांगो को उठा कर एक जोरदार धक्का मेरी चूत पर दे मारा। जिससे दादा जी का लंड मेरी चूत को चीरता हुआ अंदर घुस गया और जैसे ही दादा जी का लंड मेरी चूत मे घुसा, दर्द से मेरी चीख निकल पड़ी। मुझे लगा जैसे दादा जी ने मेरी चूत मे लंड नहीं कोई किल्ला ठोक दिया हो। मेरी आँखे बाहर निकल आयी, मै नीचे से दादा जी अपने ऊपर से हटाने की कोशिश करने लगी, पर बेकार क्यूंकी शायद वो तो इस समय पागल हो चुके थे। मै नीचे से दादा जी को अपने ऊपर से धकेलने की कोशिश करते हुए गिड़गिड़ाने लड़ी।

मै – प्लीज दादा जी निकाल लीजिये, मै मर जाऊँगी बहुत दर्द हो रहा है, मेरी आँखों से आँसू निकलने लगे।

तभी दादा जी ने अपने होंठो को मेरे होंठो ओर रख कर, मेरे होंठो को बंद कर दिया और बुलेट ट्रैन की रफ़्तार से धक्का मारा, उनका लंड जड़ तक मेरी चूत मे घुस गया। मुझे लगा जैसे मेरी जान ही निकल गयी। आप ही बताये 5 नंबर के पाओं मे 10 इंच का पैर घुसाओगे तो जूती की क्या हालत होगी। अपना पूरा लंड मेरी चूत मे डालकर दादा जी कुछ देर मेरे ऊपर ऐसे ही पड़े रहे, कुछ देर ऐसे मेरे ऊपर पड़े रहने के बाद, दादा जी ने अपने होंठो को नीचे मेरी चूचियों पर रखकर उनको चूसने लगे और धीरे अपनी कमर को चलाते हुए अपने लंड को मेरी चूत के अंदर बाहर करने लगे. भले ही मै दिल से उनका साथ नहीं दे रही थी पर मेरा बदन पूरा उनके साथ था, Dada poti sex kahani

ना चाहते हुए भी मेरे मुँह से आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह उउउउउउउउफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ बस कीजिये निकल रहा था।

आखिर दादा जी इस खेल के पुराने खिलाडी थे, मेरे कराहने की आवाज़ों से समझ गए की मुझे अब मज़ा आ रहा है, फिर क्या था दादा मेरे ऊपर से थोड़ा ऊपर उठे और मेरी खुली टांगो को और खोल कर ऊपर उठा कर अपने हाथो से मेरी दोनों टांगो को पकड़ कर, राकेट की स्पीड से अपनी कमर को चलाने लगे। उनका लंड अब फुल स्पीड से मेरी चूत मे गचा गच आ जा रहा था. रूम मे मेरी चीख़ों, सिसकियों के साथ, थप थप की आवाज़े, जो उनके बॉल मेरे चूतड़ से टकराने से हो रही थी, वो ही गूंज रही थी। सच मानो मुझे भी अब मज़ा आने लगा। पता नहीं मैंने दादा जी को अपनी बाहों मे कस लिया और मेरी कमर खुद नीचे से ऊपर चलने लगी। मै भी अब दादा जी का लंड अपनी चूत मे लेने लगी। दादा जी ने मेरी चूत का छल्ला काफी हद तक खोल दिया था, तभी दादा जी ने अपने धक्को की स्पीड इतनी बढ़ा दी, मै जान गयी कि दादा जी अब किसी भी पल मेरी चूत मे झड़ सकते है। और मै उस समय दादा जी को रोकने की स्तिथि मे नहीं थी और हुवा भी वही, दादा जी 3-4 धक्को के बाद ही मेरी चूत मे अपना माल छोड़ते हुए झड़ने लगे और मेरे ऊपर निढाल हो कर गिर पड़े।

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वैसे तो मै 2 बार पहले भी झड़ चुकी थी पर मै तीसरी बार दादा जी के साथ फिर झड़ी। कुछ देर दादा जी मेरे ऊपर लेते रहे और फिर मेरे ऊपर से उतर कर सो गए। मै भी वहाँ से उठी और अपने कपडे उठा कर अपने रूम मे आ गयी, मुझे नींद नहीं आ रही थी, सोच रही थी इस मे किसकी गलती है? मेरी, दादा जी की या फिर हालात की। खैर कब मुझे नींद आ गयी, मुझे पता नहीं। सुबह मै उठी और घर का काम करने लगी। कुछ देर बाद दादा जी मेरे पास आये वो नज़रे नहीं उठा रहे थे, ना मै कुछ बोल रही थी और ना दादा जी।

आखिर दादा जी ने हिम्मत करके धीरे से कहा – हरलीन मुझे माफ़ कर दे कल रात के लिए मै बहुत शर्मिदा हूँ, मुझसे गलती हो गयी, मुझे माफ़ कर दो।

मैं -आप माफ़ी क्यों मांग रहे है दादा जी आप नशे मे थे पर मै नहीं, गलती मेरी है मुझे आपको रोकना चाहिए था।

खैर उस दिन मेरे दादा जी के बीच ज्यादा बात नहीं हुयी। अगले 2 दिन दादा जी ने शराब नहीं पी, पर फिर दादा जी ने शराब पी और फिर वही हुआ, दादा जी मुझे दादी समझ कर चोदा। अब तो लगभग हर रोज होने लगा, दादा जी रोज बहुत ज्यादा शराब पीते और रात को मुझे चोदते। सच कहु अब मुझे भी अच्छा लगने लगा ..एक रात दादा जी बोतल निकाल कर पीना शुरू करने ही वाले थे, Dada poti sex kahani

मैंने दादा जी को रोका। मैं – दादा जी मुझे आप से कुछ बात करनी है।

दादा जी – बोलो हरलीन!

मैं – दादा जी हम जो कर रहे वो गलत नहीं है? किसी को पता चल गया, तो क्या होगा? आप करते भी बिना कंडोम के है और अंदर ही गिराते है, कहीं मै प्रेग्नेंट हो गयी और लोगो को पता चल गया, कि हम दादा पोती है तो क्या होगा।

दादा जी – कह तो तुम ठीक रही हो।

मै – कुछ तो सोचना पड़ेगा।

दादा जी – एक रास्ता है हरलीन!

मैं – कौन सा रास्ता दादा जी?

दादा जी – हम शादी कर ले फिर कोई कुछ बोल नहीं सकता।

दादा जी कह तो ठीक रहे थे पर शादी दादा जी से।

मैं – शादी!

दादा जी – हरलीन बस यही एक रास्ता है, देखो हम दोनों ही एक दूसरे का सहारा है, हम रह भी तो पति पत्नी की तरह है, तो फिर शादी करने मे क्या दिक्कत है।

मैं – अपना चेहरा झुकाये मै सोच कर बताऊँगी!

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तभी दादा जी को पता नहीं क्या हुआ उन्होंने वहाँ गुलाब के गुलदस्ते मे से एक गुलाब निकालकर मेरे सामने किसी फ़िल्मी हीरो की तरह घुटनो के बल बैठ कर, मेरी ओर गुलाब का फूल बढ़ा कर बोले , हरलीन मुझसे शादी करोगी? पता नहीं मुझे उस समय क्या हुआ दादा जी का मुझे इस तरह शादी के लिए प्रपोज़ करने के तरीके पर मै शर्म से नज़रे झुकाये मंद मंद मुस्कराने लगी। दादा जी के मुझे इस तरह प्रपोज़ करने कर शर्माना और मुस्कराना, दादा जी के लिए मेरी हां के लिए ग्रीन सिग्नल था। दादा जी मेरी ओर गुलाब का फूल बढ़ाते फिर से बोले , हरलीन विल यू मैरी मी? तो मैंने मुस्कराते हुए दादा जी के हाथ से गुलाब का फूल ले लिया। Dada poti sex kahani

दादा जी तो ख़ुशी से झूम उठे और मेरे चेहरे को अपने हाथ से उठा आँखों मे आँखे डालते बोले..

सच हरलीन और ख़ुशी से जाम उठा कर बोले आज पीने मे मज़ा आएगा।

मै शर्म से बाहर जाने लगी, तो दादा जी मेरा हाथ पकड़ कर बोले, कहा जा रही हो?

तो मै बाहर जाने लगी तो दादा जी बोले हरलीन बोलो ना मै तुम्हारे मुँह से सुनना चाहता हूँ।

मै – दादा जी मै तैयार हूँ पर आप को इससे पहले मुझ से एक प्रोमिस करना होगा।

दादा जी – हरलीन तुम जो कहोगी मुझे सब मंजूर है।

मैं – तो आप प्रोमिस कीजिये कि आप शादी के बाद शराब नहीं पीएंगे।

दादा जी – फिर कौन कमबख्त इस बोतल को हाथ लगाएगा और मेरी आँखों मे आँखे डाल कर बोले, जो नशा इन नशीली आँखों मे है वो इस बोतल मे कहा, बस मेरी जान तुम अपनी मदमस्त आँखों से पिला दिया करो, हमे तो नशा वैसे ही हो जायेगा.

दादा जी के मुँह से इतनी रोमांटिक बात सुन मैने शर्म से अपना चेहरा झुका लिया।

दादाजी – तो फिर तुम्हे भी आज मुझसे एक वादा करना होगा।

जब दादा जी ने मुझसे प्रोमिस करने को कहा तो मुझे लगा कि दादा जी मुझसे मेरी गांड मारने या फिर मुझसे अपना लंड चूसने का वादा लेंगे, क्युकी मै जानती थी हर मर्द की तरह दादा जी मेरी गांड मारने की तम्मना रखते होंगे, सच मानिये अब मुझे दादा जी से अपनी गांड की नथ उतरवाने और उनका लंड चूसने मे कोई परहेज़ नहीं था, आखिर वो मेरे पति जो होने वाले थे, मेरी चूत की सील उन्होंने खोली तो मेरे बाकी के छेद को भी खोलने का हक़ उनका ही था।

मै धीरे से मुँह झुकाये बोली – कैसा वादा दादा जी?

दादा जी – हरलीन तुम्हे वादा करना होगा कि आज से तुम मुझे दादा जी नहीं कहोगी।

अब से दादा जी को दादा जी नहीं कहने पर मेरा चेहरा शर्म से लाल हो गया और मैने अपना चेहरा घुमा लिया, क्युकी मै जानती थी की अगर मै दादा जी को दादा जी नहीं कहूँगी तो मुझे क्या कहना होगा। दादा जी मेरे पीछे आये और अपना सर मेरे कंधे पर रख कर मुझसे पूछने लगे.. Dada poti sex kahani

दादाजी – बोलो हरलीन अब से नहीं कहोगी ना दादा जी।

मैं दादा जी के इस तरह पूछने पर मंद मंद मुस्कराते हुए बोली..

मै – अगर दादा जी ना कहु तो क्या कहु आप मेरे दादा जी हो ना।

दादा जी ने मुझे दीवार के साथ सटा दिया और अपनी बाहों का घेरा मेरे इर्द गिर्द करके मेरी आँखों मे आँखे डाल कर बोले..

दादा पोती का रिश्ता तो पहले था अब नया रिश्ता हमारे बीच होने जा रहा है उस रिश्ते मे तुम्हें नहीं पता क्या कहना है तुम्हे? जैसे हर बीवी कहती है मेरे नाम से या अजी सुनते हो, जानू , डार्लिंग जो तुम्हे अच्छा लगे।

दादा पोती सेक्स कहानी हिन्दी

दादा जी के इन नामो से बुलाने पर मै शर्म से मुस्कराती अपनी नाक को उनकी नाक से रगड़ती मुझे शर्म आती है।

दादा जी – शर्म किस से अब हम एक है ना? वैसे भी और तुम लोगो के सामने दादा जी थोड़े ही कहोगी उनके सामने भी तो कुछ बोलोगी।

दादा जी की बात सही थी।

मैं – मुस्कराते हुए सोचूंगी और जल्दी से उनकी बाहों से निकल कर बाहर जाने लगी।

तो दादा जी ने मुझे रोका.. दादा जी – हरलीन!

तो मै रुक गयी, मुझे लगा दादा जी अब क्या करेंगे, तो दादा जी मेरे पीछे आये और अपना चेहरा मेरे चेहरे के नज़दीक ला कर बोले…

बताओ ना, डार्लिंग अब तो दादा जी नहीं कहोगी ना?

तो मै मुस्कराते अपनी ज़ुल्फें अपने चेहरे से हटाने लगी।

दादा जी – बोलो ना डार्लिंग!

तो मैंने दादा जी के जोर देने पर धीरे से कहा – डार्लिंग और अपने चेहरे को दूसरी ओर घुमा लिया

तो दादा जी किसी हीरो की तरह मेरा चेहरा पकड़ कर अपनी और घुमाते हुए बोले – क्या कहा तुमने डार्लिंग?

मै शर्म से पानी पानी हो रही थी और धीरे से बोली जाने दीजिये ना!

तो दादा जी मुझे अपनी बाहों मे कसते ही जा रहे थे।

दादाजी – पर जाने से पहले डार्लिंग अपने गुलाबी रसभरे होंठो का जाम तो पिला दो..

Dada ne poti ki seal todi

ये कहते हुए दादा जी ने अपने मीठे होंठ मेरे गुलाबी होंठो पर रख दिए और मेरे होंठो को अपने होंठो मे दबा कर चूसने लगे। उस समय मुझे भी ना जाने क्या हुवा मैं भी अपनी बाहें दादा जी के गले मे डाल कर उनसे लिपट गयी। दादा जी मुझे अपनी बाहों मे कसे, मेरे होंठो, मेरे गालो को चूम रहे थे। मै बस आँखे बंद किये बड़बड़ा रही थी। बस कीजिये ना और फिर अपनी आँखे दादा जी की आँखों मे डालकर पहली बार दादा जी से कामुक तरीके से बोली।

मै – कितनी चुभ रही आपकी दाढ़ी और मूँछें, मेरा तो पूरा मुँह ही छिल गया, हटाइये ना! और दादा जी की बाहों से निकल गयी।

दादा जी – हरलीन अगर तुम कहो मै किसी पंडित जी से अभी बात करू? हम कल ही शादी कर लेते है।

मै क्या जवाब देती धीरे से बोली जैसा आप चाहे।

तो दादा जी मेरे कान मे बोले – ठीक है पंडित जी से बात करके तुम्हे बताता हूँ।

मैं – जी और सर दादा जी कंधे पर रख कर अपना मुँह उनके सीने मे छुपा लिया और बोली अब मै चलू अपने रूम मे?

दादा जी – सिर्फ आज रात के लिए कल से, हम दोनों का रूम एक ही होगा।

मैं – आप बड़े शैतान है और वहाँ से जाने लगी, तो दादा जी मुझे जाते देख कर बोले, अभी बात करके तुम्हे बताता हूँ।

मै अपने बैडरूम मे आ कर सोचने लगी और कल जो होने वाला था उसे सोच कर मेरा चेहरे पर शर्म के साथ मुस्कराहट आ गयी। मै अपने बेड पर लेटी सोच रही थी कि कल तक तो दादा जी मेरी चुदाई नशे मे करते थे और अब क्या मै उनका साथ दे पाऊँगी? यह सोच कर मैंने शर्म से अपना मुँह तकिये मे छुपा लिया।

कहानी जारी रहेगी आगे कैसे दोनों शादी करेंगे और कैसी रहेगी दोनों की सुहागरात जानिए अगले पार्ट मे…

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